भारत व चीन स्वाभाविक मित्र हैं
हालिया घटनाक्रम ने मुझे थोड़ा व्यथित किया और कुछ आलेखों को पढ़कर बिल्कुल बुरा नहीं लगा बल्कि वे सभी सच्चाई से प्रेरित हैं लेकिन मैं इस आलेख के माध्यम से यह जोड़ना भी चाहता हूँ कि क्या कोई व्यक्ति अपने मित्र की बुराइयों का इस तरह खिल्ली उड़ाता है और बुराइयाँ कहाँ नहीं होती है, बुराइयाँ सभी में होती है और हम हमेशा उन्हें कम करते रहते हैं और समय के साथ हम उनके साथ कभी-कभी समझौता भी कर लेते हैं। हमारी व्यवस्था में भी दोष है और हम उन्हें समाप्त करने के लिए प्रयासरत हैं। मैं यहाँ तू-तू, में-में करने नहीं आया हूँ और न ही आपकी बुराइयों पर ध्यान इंगित करना चाहता हूँ। आप बोलते हो कि भारत चीन के साथ सहयोग न कर अमेरिका के पीछे पड़ा हुआ है पर ये भी तो सच्चाई है कि आपके तरफ से भी तो समुचित सहयोग नहीं मिला, जो वाजिब है। आपने तो कई बार हदें भी पार कर दिया और आप हमसे अब भी मित्रता की उम्मीद रखते हो। मित्रता द्विपक्षीय होती है और इस प्रकार आपने तो कभी सकारात्मक कोशिश ही नहीं की। हमारे बीच एक युद्ध हुआ और आप जानकर खुश हो जाएंगे कि हम कभी युद्ध में विश्वास नहीं रखते हैं बल्कि हमने तो कभी किस...