संदेश

चीन लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं
कुमारवाणी पर आपका स्वागत है।

भारत व चीन स्वाभाविक मित्र हैं

चित्र
हालिया घटनाक्रम ने मुझे थोड़ा व्यथित किया और कुछ आलेखों को पढ़कर बिल्कुल बुरा नहीं लगा बल्कि वे सभी सच्चाई से प्रेरित हैं लेकिन मैं इस आलेख के माध्यम से यह जोड़ना भी चाहता हूँ कि क्या कोई व्यक्ति अपने मित्र की बुराइयों का इस तरह खिल्ली उड़ाता है और बुराइयाँ कहाँ नहीं होती है, बुराइयाँ सभी में होती है और हम हमेशा उन्हें कम करते रहते हैं और समय के साथ हम उनके साथ कभी-कभी समझौता भी कर लेते हैं। हमारी व्यवस्था में भी दोष है और हम उन्हें समाप्त करने के लिए प्रयासरत हैं। मैं यहाँ तू-तू, में-में करने नहीं आया हूँ और न ही आपकी बुराइयों पर ध्यान इंगित करना चाहता हूँ। आप बोलते हो कि भारत चीन के साथ सहयोग न कर अमेरिका के पीछे पड़ा हुआ है पर ये भी तो सच्चाई है कि आपके तरफ से भी तो समुचित सहयोग नहीं मिला, जो वाजिब है। आपने तो कई बार हदें भी पार कर दिया और आप हमसे अब भी मित्रता की उम्मीद रखते हो। मित्रता द्विपक्षीय होती है और इस प्रकार आपने तो कभी सकारात्मक कोशिश ही नहीं की। हमारे बीच एक युद्ध हुआ और आप जानकर खुश हो जाएंगे कि हम कभी युद्ध में विश्वास नहीं रखते हैं बल्कि हमने तो कभी किस...
यहाँ मानक हिंदी के संहितानुसार कुछ त्रुटियाँ हैं, जिन्हें सुधारने का काम प्रगति पर है। आपसे सकारात्मक सहयोग अपेक्षित है। अगर आप यहाँ किसी असुविधा से दो-चार होते हैं और उसकी सूचना हमें देना चाहते हैं, तो कृपया संपर्क प्रपत्र के जरिये अपनी व्यथा जाहिर कीजिये। हम यथाशीघ्र आपकी पृच्छा का उचित जवाब देने की चेष्टा करेंगे।