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हिंदी के पुरोधा

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मैं एक हिंदीप्रेमी व लेखक (कुछ हद तक) के नाते पूरे   भारत व उसके   नागरिकों से आह्वान करना चाहता हूँ कि हिंदी सहित हमारी सभी भाषायें मातृतुल्य हैं   और सर्वजनों को इनका सम्मान सदैव करना ही चाहिए। मैं एक भाषा के अन्य पर अधिपत्य   को स्वीकारने के पक्ष में नहीं हूँ, किंतु हमें यह भी समझना होगा कि जबतक हमारी   भाषाओं के बीच आपसी समन्वय स्थापित नहीं होगा, तबतक हम भाषाई विविधाताओं को   स्वीकारने में हम असमर्थ साबित होते रहेंगे। मैं एक भाषाप्रेमी के तौर पर भी सभी को आशवस्त करना चाहता हूँ कि   हमारी भाषाओं के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलना चाहिए और ऐसा किसी   राजनीतिक व अराजनीतिक हस्तक्षेप के बगैर ही मुमकिन है। स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होने   से हमारी भाषाओं की विविधताओं में वृद्धि ही होगी और वे शाब्दिक रूप से भी समर्थवती   साबित होंगी। हमारे यहाँ का एक धड़ा हमेशा यही साबित करने में लगा रहता है कि हमारी   भाषाओं को उनके रहमोकरम पर छोड़ देना चाहिए क्योंकि इन तथाकथितों का मानना है कि   ये जनभाषाएं किसी भी रूप में इनके जागीर...

100 Most Effective SEO Strategies

If you are reading this page, then I’m pretty sure that you are a blogger or keenly interested to pursue that. In this article, I am going to explain you about those most 100 efficient & effective SEO strategies people must have during writing or publication of their each & every web presence and those depend on various points that are described below. Those are technically related to On-page & Off-page optimization. I am considering that you have a blog or a website hosted at blogger or WordPress . I am a big fan of blogger and WordPress because they provide many advantageous tools and add-ons to your blogs or websites. Adding to that, they have huge community support too. What is SEO? If you want to make your brand (here, your blog or website) a common name, then you must consider about SEO because this is like a Megapunch that can make you stronger if you are working in the right direction but if you are driving in the wrong direction, then you must get p...

What does that mean: in search of my destiny…?

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यह आलेख मेरे लिंक्डइन मित्रों के लिये विशिष्टतः लिखा गया लेकिन इसकी व्यवहारिकता को देखते हुये इसे यहाँ भी प्रकाशित किया गया है। I  didn’t know what it was during writing that. I don’t know what it still is, I also don’t know what it must be or what it’s in the ideal world but I know what my destiny must be. According to me, Destiny is the last position that we want to get (once) in our life and that may not be achieved by the way we do prefer our works in our dailies but if you think that you are so important to your destiny that you cannot compromise with that and then, you make every possible ways that go to the point which leads to your destiny. We make changes to our schedules and report it according to the needed requirements and yes, I accept it that it takes time to achieve that but you know the taste of achieving that. I have just had some of that when I got my content (this) ready for being published before just pressing  Publish  button. ...

नामकरण- समीक्षा

स्टार प्लस पर इसी सप्ताह एक नया धारावाहिक शुरु हुआ है और उसका नाम नामकरण रोचक भी है। इसी सप्ताह शुरु हुआ और पहले दिन से ही कहानी अच्छी लगने लगी। एक प्यारी बच्ची, उसकी माँ और उन दोनों के साथ न रहने वाला पिता- इन तीनों के समावेश ने कहानी को रोचक बना दिया था और शेष काम इसके झलक ने कर दिया था। जब मुझे पता चला कि यह धारावाहिक महेश भट्टजी का है तो मुझे कुछ अचरज नहीं लगा क्योंकि उनकी रचनात्मकता पर मैं सवाल उठा भी नहीं सकता हूँ। इसकी कहानी जैसे-जैसे बढ़ रही थी, मेरी उत्सुकता भी बढ़ रही थी कि आगे क्या होगा। भट्टजी का धारावाहिक होने के कारण मैं धार्मिक कोण को नजरअंदाज भी नहीं कर पा रहा था लेकिन कहानी खूबसूरत होगी, इसका मुझे पूरा विश्वास था। कहानी अपने रफ्तार पर थी और दिखाया गया कि इस धारावाहिक की कलाकार आशा एक मुसलमान लड़की है और उसका पति आशीष एक हिंदू है और उनकी एक प्यारी बेटी अवनि है। यहाँ तक तो आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता था कि उनका विवाह धर्म अलग होने के कारण पूरा न हो सका और आशीष की माँ ने इसकी अनुमति नहीं दी और वे दोनों दुनिया से छिपाकर अपना रिश्ता निभाने लगे। मैंने सोचा कि आगे की कह...

सत्तर लखिया स्वर्ण, तो पैंसठ करोड़ी रजत भाग-4

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हमें ध्यान रखना होगा कि हमारी नारीसेना ने इस बार ओलंपिक में अपना जलवा दिखाकर देश का नाम रोशन किया| इसका अर्थ बिल्कुल यह नहीं है कि हमारे लड़के या बाकी खिलाड़ी कहीं कम थे, इन्हें तो सुविधाओं की कमी ने मारा और साथ में अधिकारियों के असहयोग के कारण उत्पन्न हुई मनोदशा ने पूरा खेल बिगाड़ दिया| खेल समापन के बाद हवाईअड्डे से लेकर विभिन्न कार्यक्रमों में इनका जो आतिथ्य हुआ, वह वाकई काबिल-ए-तारीफ था और इनपर हुई धनवर्षा से विभिन्न सरकारों ने भी जनता के साथ अपनी सोच साझा किया और यहाँ तक कि ऐसे राज्य सरकारों ने भी धनवर्षा की जिनका खुद की स्थिति इतनी खराब है कि वे एक खिलाड़ी तक पा सके हैं जो पदकधारी हो लेकिन क्या कीजिएगा साहब, यहाँ राजनीति में हर चीज जायज है, जबतक कि कोई ऊँगली न उठा दे| हम हर्षोल्लास के साथ इनकी तारीफों में कसीदे गढ़े और आज हमने उन्हें भुला दिया है| हमने इनपर हुई धनवर्षा का खुब ध्यान रखा लेकिन हमारा ध्यान अगली सिंधु या अगली साइना या अगली दीपा या अगला गोपीनाथ या अगली साक्षी ढूँढने पर नहीं था बल्कि हम तो केवल उनके जश्न में मात्र शरीक होने आए थे| हमारी सरकारों ने विभिन्न मदों म...
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