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विचारों का कटाव

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हम अपनी निजी जिंदगी में इस कदर व्यस्त हैं कि हमारा ध्यान समाज की उन्नति से हट जाता है | हम समाज से कटने लगते हैं | आप बोल सकते हैं कि इसमें आपका पूरा दोष नहीं है लेकिन हम इसके भागीदार तो जाने-अंजाने बन ही जाते हैं | मैं मानता हूँ कि हम सभी रोटी की तलाश में अपने घर से दूर किसी नए बसेरे में अपनी दुनिया बसाते हैं और इसकी सुरक्षा में दिन-रात बिता जाते हैं लेकिन हम जहाँ रहते हैं या हमारी पैदाइश जहाँ की होती है , हम धीरे-धीरे उनमें से किसी एक को चुनने लगते हैं | ऐसा बिल्कुल गलत भी नहीं है जब आपको इनमें से किसी एक को चुनना पड़े लेकिन जब बात अस्मिता की आती है , तब दिक्कत हो जाती है | आप द्वंद्व में पड़ जाते हैं कि किसे चुनूँ , उसे जहाँ मैं पैदा हुआ या जहाँ मेरा रोजगार है और अलबत्ता ये सबके साथ होता है और हम अंततः खाली हाथ ही रहते हैं | बड़े शहर के बड़े ख्यालों ने हमें बस इतना सिखाया है कि आप खुश रहना सीख जाओ , बाकी काम चलते रहेंगे | कभी-कभी किसी एक की नासमझी भी सबपर भारी पड़ जाती है और शायद इस कारण भी हम अपने हाथ पीछे खींच लेते हैं लेकिन हमें समझना होगा कि हम जिस समाज में रहते हैं वह ...

ब्लैक हॉक डाउन कविता

यह एक बेहद प्यारी कविता है जो मूलरूप से अंग्रेजी में है और आप पाठकों के लिए इसका हिंदी संस्करण तैयार किया गया है, ताकि आप भी इसके मर्म से परिचित हो सकें। असल में यह कविता 2001 की फिल्म ब्लैक हॉक डाउन नामक फिल्म के बोल का हिस्सा है जिसे सुनकर या पढ़कर कोई भी मोहित हो जाता है। आप भी ध्यानपूर्वक पढ़कर इसका आनंद लें। कविता : मेरे प्यार , आप मजबूत हैं और आप अपनी जिंदगी में अच्छा ही करेंगे         मैं आपको व हमारे बच्चों को बेहद प्यार करता हूँ         आज और कल , प्रत्येक दिन को इसी तरह बढ़ने दो         मुस्कान रखो और कभी हार मत मानो , तब भी जब हालात आपके मुताबिक न हो।         आखिर में इतना ही कहूँगा कि आज रात बच्चों को बिस्तर पर हल्के से गले लगाया         उनसे कहो कि मैं उनसे प्यार करता हूँ और तब उनके गले लगकर         आज रात के लिए उनके पापा के तरफ से चूम लो। मूल कविता : My love, yo...

खयालात या...

हम जब छोटे होते हैं, तब हमारे माँ-बाप ही हमारी दुनिया होते हैं| हम हर रोज उसी छोटी सी दुनिया से अपने लिए नई कहानियाँ, नए खिलौने और कभी-कभी तो नए किरदार तक गढ़ लेते हैं| हमारी रचनात्मकता जब हिलौरे ले रही होती है, तबतक हम किशोरावस्था में पहुँच जाते हैं और हमपर कई बंदिशे लगा दी जाती है या स्वतः लग जाती है और हम उस समय अपनी नासमझी में विरोध कर देते हैं या फिर दब जाते हैं लेकिन इन दोनों के ही फलस्वरूप हमारी रचनात्मकता पर विराम लग जाता है| अब हमारी दुनिया बड़ी होने लगती है| वह फेसबुक, ट्विटर जैसे सामध्यमाओं के कारण इतनी बड़ी हो जाती है कि हम इसकी कल्पना तक नहीं कर पाते हैं| इस समय हम केवल अपने अभिभावकों के परामर्श पर ही कोई काम नहीं करते हैं| हमारी अपनी अलग दुनिया बनने लगती है जहाँ हमारे कई दोस्तों का आना-जाना लगा रहता है| कुछ हमारे सर्वश्रेष्ठ मित्र बन जाते हैं, तो कुछ गुमशुदा बनकर रह जाते हैं| कुछ ऐसे भी होते हैं जिनकी भूमिका हमारे जीवन में नगण्य होती है लेकिन जरूरती वक्त में वे एक जादूगर के रूप में हमारे सामने प्रस्तुत होते हैं और झटपट हमारी समस्या को सुलझा देते हैं| इनमें से कुछ का ...

आस अच्छे कल की

इस ६ और ७ को मेरे दो प्यारे दोस्तों का जन्मदिन था और हमेशा की तरह मैंने उनकी उपेक्षा की। मैं शायद हमेशा यही चाहता हूँ कि जो चीज मुझे पसंद आए, वह चीज केवल मेरी होनी चाहिए और उसपर किसी का भी अधिकार नहीं होना चाहिए एवं मैं जो मानता हूँ, उसे सभी सिरमौर मानें लेकिन इस दुनिया में यह कहाँ तक संभव है। हम अपने सपनों की उड़ान में अपने घर से इतने दूर चले आते हैं कि एक दिन वहाँ वापस लौटना ही सबसे बड़ा सपना बन जाता है लेकिन हम यह तब समझते हैं जब चिड़िया खेत चुग जाती है लेकिन तब भी हम आशा की किरण नहीं छोड़ना चाहते हैं। हमारे जीवन में आनेवाले हरेक शख्स को डाकिया समझकर उसके अपने घर तक एक पत्र पहुँचाना चाहते हैं कि शायद वहाँ से सीधे बुलावा आ जाए लेकिन यह खेत चरने जितना आसान भी नहीं है। वैसे मैं शीर्षक पर आता हूँ, बहुत द्विअर्थी संवाद हो गया और अब सीधे मुद्दे पर बोलूँगा। मैंने एक को एक दिन पहले ही वाट्सएप पर गुलदस्ता भेजकर उसे याद दिलाया और उस दिन और उसके अगले दिन उससे बात भी किया लेकिन दूसरे को केवल गुलदस्ता (वाट्सएप पर ही) भेज पाया। कारण पता नहीं, क्यों मैं उसे फोन नहीं कर पाया, शायद किसी दुविधा मे...

वो दो मिनट

कल दोपहर मैं अपने एक अजीज दोस्त से मिला और उसे देखकर तो पहले बहुत खुश हुआ कि चलो , आज किसी अपने से मुलाकात हुई | उसे देखने पर मुझे अहसास हुआ कि वह थोड़ा मायूस है और शायद वह परेशान भी है लेकिन समय की कमी ने मेरे हाथ बाँधे हुए थे और इस कारण मैं उससे ज्यादा बात न कर पाया | मैंने उससे उसका हालचाल पूछा और फिर उसके काम के बारे में पूछकर उससे अलविदा हो गया | मैं जब उससे थोड़ी दूरी पर था , तो मेरा मन उससे गले लगने को किया क्योंकि वह मेरा अच्छा दोस्त है और एक समय तो हमारी दोस्ती शानदार थी लेकिन मैं नहीं कर पाया | जिंदगी में मैंने जितने काम किए हैं , उससे ज्यादा तो मैंने शुरु करके छोड़ दिया या फिर मानस स्तर पर ही रद्दोबदल हो गया | मैं उस समय उसी के बारे में सोच रहा था | पता नहीं , उसके बारे में सोचने से क्या मिलनेवाला था या क्या खो सकता था लेकिन उसके चेहरे के सिकन मुझे व्यथित कर रहे थे | वह और मैं दसवीं तक साथ पढ़े और उसके बाद मैं दएवै आ गया और वह मारवाड़ी आ गया | इसके बाद हमारा सामना कम हो गया था लेकिन हम जब भी मिलते थे , गर्मजोशी के साथ एक-दूसरे का अभिवादन करते थे लेकिन आज जब उसके चेहरे से ...

नामकरण- समीक्षा

स्टार प्लस पर इसी सप्ताह एक नया धारावाहिक शुरु हुआ है और उसका नाम नामकरण रोचक भी है। इसी सप्ताह शुरु हुआ और पहले दिन से ही कहानी अच्छी लगने लगी। एक प्यारी बच्ची, उसकी माँ और उन दोनों के साथ न रहने वाला पिता- इन तीनों के समावेश ने कहानी को रोचक बना दिया था और शेष काम इसके झलक ने कर दिया था। जब मुझे पता चला कि यह धारावाहिक महेश भट्टजी का है तो मुझे कुछ अचरज नहीं लगा क्योंकि उनकी रचनात्मकता पर मैं सवाल उठा भी नहीं सकता हूँ। इसकी कहानी जैसे-जैसे बढ़ रही थी, मेरी उत्सुकता भी बढ़ रही थी कि आगे क्या होगा। भट्टजी का धारावाहिक होने के कारण मैं धार्मिक कोण को नजरअंदाज भी नहीं कर पा रहा था लेकिन कहानी खूबसूरत होगी, इसका मुझे पूरा विश्वास था। कहानी अपने रफ्तार पर थी और दिखाया गया कि इस धारावाहिक की कलाकार आशा एक मुसलमान लड़की है और उसका पति आशीष एक हिंदू है और उनकी एक प्यारी बेटी अवनि है। यहाँ तक तो आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता था कि उनका विवाह धर्म अलग होने के कारण पूरा न हो सका और आशीष की माँ ने इसकी अनुमति नहीं दी और वे दोनों दुनिया से छिपाकर अपना रिश्ता निभाने लगे। मैंने सोचा कि आगे की कह...

कुछ गड़बड़ है

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हममें से कुछ अभी शायद क्रिकेट मैच देखकर सोने की चेष्टा कर रहे होंगे और कुछ अपनी दिनचर्या समेटने में व्यस्त होंगे लेकिन क्या हम खुद की भूख मिटा पा रहे हैं। हम रोज इतनी मेहनत करते हैं और हर रोज कुछ नया करने की चाहत ने हमें इतना अंधा बना दिया है कि हम आज को भूल जाते हैं। हम स्वयं को भूलते जा रहे हैं। हम स्वयं से दूर होकर ऐसी चीजों के पीछे दौड़ रहे हैं जो नश्वर है। हम खुद इतने व्यस्त हो गए हैं कि इतना भी नहीं तय कर पा रहे हैं कि हमारी जरूरतें कितनी हैं और हम इनमें से कितना पूरा कर पा रहे हैं लेकिन हर रोज की चाहत में इतना कुछ हासिल कर जाते हैं जो शायद इतना होता है कि हम उन्हें सहेज नहीं पाते और ये चीजें कुछ समय बाद ऐसी हालत में होती है जब हमें तय करना पड़ता है कि कौन सी चीजें हमारे लिए ज्यादा महत्वपूर्ण है और इसमें से भी हम अधिकतर गलत विकल्प चुनते हैं। विकल्प उतने महत्वपूर्ण नहीं है , जितने इंसान हैं लेकिन हम इंसानों के ऊपर उन विकल्पों को तवज्जो दे जाते हैं जो हमारे लिए अल्पकालीन होती है लेकिन हम क्यों ऐसा कर जाते हैं ? हम कई बार द्वंद्व में रहकर निर्णय लेते हैं और आगे कुआँ , पीछे खा...

हास्य के सफर में

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हम सभी मनोरंजन के आदी हैं और इसके कई प्रकारों से अभिभूत रहे हैं।   मनोरंजन के विभिन्न प्रकारों में हास्य एकमात्र विधा है जिसके लिए कोई विवाद नहीं होता और सभी लोग हास्य कार्यक्रम देखते भी हैं। आज भले ही हम हास्य के विभिन्न रूप देखते हो लेकिन हास्य का नैसर्गिक रूप हमें सर्वाधिक रोमांचित करता है।   हम उम्र के किसी भी पड़ाव पर हो लेकिन हास्य कार्यक्रमों को जरूर देखना चाहते हैं।   हमारे भारतीय कार्यक्रम निर्माता भी हास्य कार्यक्रमों को लेकर उत्साहित रहते हैं और हमें हास्याधारित विभिन्न कार्यक्रम प्रस्तुत करने से नहीं हिचकते हैं और इनमें से एक तारक मेहता का उल्टा चश्मा है जो सब टीवी पर सोमवार से शुक्रवार रात साढ़े आठ बजे प्रसारित होता है। तारक मेहता का... एक लोकप्रिय होने के साथ विविधतापूर्ण कार्यक्रम भी है।   आप अगर हास्य आधारित कार्यक्रम देखना पसंद करते हो ,   तो आपको यह कार्यक्रम बिल्कुल देखना चाहिए। मैं खुद इस कार्यक्रम का प्रशंसक हूँ और सालों से इसे देखता आया हूँ और आज रात भी इसे देखा |   मेरे इस आलेख का आशय यह भी है कि हम अपनी व्यस्त जिंदगी में काफी ...

जन्मदिन

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मेरे यारों का जन्मदिन आज मेरे एक यार का जन्मदिन है लेकिन मैंने अबतक उसे जन्मदिन की बधाई नहीं दे पाया हूँ। कारण थोड़ा व्यक्तिगत है इसीलिए आपके साथ साझा नहीं कर सकता लेकिन आज का दिन मुझे एक सवाल कर रहा है कि हमारे जीवन में जन्मदिन का क्या तात्पर्य है और आप किसी विशेष को क्यों उसके ज'दिन की बधाई देते हैं जबकि उस विशेष दिन के कारण आपकी उम्र एक वर्ष अधिक हो जाती है और मेरे अनुसार आपकी उम्र एक वर्ष कम भी हो जाती है। देखता हूँ, बारह बजने में अभी भी शेष हैं और तबतक शायद मैं उससे बात कर सकूँगा। मैं बात तो उससे कर ही लूँगा लेकिन उसके बाद क्या।।। कुछ नहीं, असल में हमारे पास साझा करने के लिए कुछ नहीं है। मैं उससे प्रभावित तो हूँ लेकिन थोड़ा ज्यादा और इतना कि बयाँ नहीं कर सकता हूँ। उसकी कालन यानि टाइमिंग का कायल हूँ लेकिन फिर भी नादानों की तरह फिर रहा हूँ कि कहीं से कोई बैसाखी मिल जाए लेकिन ये दुनिया इतनी शरीफ न तो कभी थी और न ही आज है, तो इतनी आसानी से ये मुमकिन नहीं होता दिखता और मैं चुप हो जाता हूँ। मेरी खामोशी कभी-कभी मुझसे हिसाब भी माँगती है लेकिन जब नील बटे सन्नाटा है तो कैसा ...

क्रोध टालने के सात रामबाण

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कैसे क्रोध रोकें??? हम सभी कभी न कभी कुछ ऐसे हालातों से मिल जाते हैं जहाँ से पीछे हटना नामुमकिन साबित होता है और इनमें से एक हमारा क्रोध है। हम सभी क्रोध से दूर रहना चाहते हैं लेकिन न चाहते हुए भी इसके शिकार बन जाते हैं। इस आलेख में हम इसी क्रोध को दूर करने के सात महत्वपूर्ण उपायों की चर्चा करेंगे जो निम्नलिखित हैं: 1. क्रोध रविवार को आए, तो कहिए- आज छुट्टी का दिन है। 2. सोमवार को आए, तो कहिए कि सप्ताह की शुरुआत है, आज नहीं करूँगा। 3. मंगलवार को आए, तो कहिए कि मंगल में अमंगल क्यों करूँ। 4. बुधवार को आए, तो कहिए कि बुध तो शुद्ध है, इसे अशुद्ध क्यों करूँ। 5. गुरुवार को आए, तो कहिए कि आज गुरु का दिन है। आज मन में शांति रखना है। 6. शुक्रवार को आए, तो कहिए कि आज भगवान को शुक्रिया अदा करने का दिन है। 7. और शनिवार को आए, तो कहिए कि शनि के दिन घर में शनिचर क्यों आए। आप इन सप्त उपायों से अपने तनमन को प्रसन्न व क्रोध से दूर रख सकते हैं। क्रोध से दूर रहें और खुश रहें।  आशा है कि आपको यह आलेख अवश्य पसंद आएगा।
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