विदेश नीति
आज हम विदेश नीति पर चर्चा करेंगे और एक आम राय बनाने की कोशिश करेंगे कि आज के वैश्वीकरण के दौर में विदेश नीति की सशक्त भूमिका कैसे किसी देश के विकास में प्रत्यक्ष तौर पर होती है| आज हम जिस दौर में हैं, उस दौर में विकसित देशों का सकल घरेलु उत्पाद यानि कि सघउ दर घटोतरी पर है लेकिन वहीं दूसरी तरफ विकासशील देशों का जीडीपी दर बढ़ोतरी पर है| मैं मानने को तैयार हूँ कि सघउ दर से आप किसी देश के संपूर्ण विकास का आकलन नहीं कर सकते हैं लेकिन हमें किसी पैमाने की जरूरत तो होगी जिसपर हम खुद को माप सकें और भूटान इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है, जहाँ विकास के मायने शेष दुनिया से अलग है| हम एक व्यक्ति या देश के तौर पर किसी अन्य देश के विरूद्ध सीधे कुछ नहीं कर सकते हैं क्योंकि हम लोकतांत्रिक आस्था से भी बँधे हुए है और हमारा विश्वास भी है कि हर देश प्रगति करें और इसके लिए उसे अपनी अस्मिता से समझौता भी न करना पड़े| खैर, जो देश जैसे चाहे, वैसे पैमाने तय करके अपने यहाँ विकास करे लेकिन हमें यह मानना होगा कि विकसित देशों के पास मुद्रा है और भारत जैसे विकासशील देशों को उस मुद्रा की जरूरत है लेकिन इसके ...