हमारी भागमभाग भरी जिंदगी
हम सभी ने गोविंदा की फिल्म भागमभाग देखा ही होगा और जिन्होंने नहीं देखा है , वे एक बार तो इसे देख ही सकते हैं क्योंकि हमारी जिंदगी उन किरदारों से कम भी नहीं है। मैं गोविंदा का प्रशंसक हूँ लेकिन मैं इस आलेख में गोविंदा की प्रशंसा करने हेतु नहीं आया हूँ। मैंने केवल उस फिल्म का नाम लिया है क्योंकि इसका नाम जितना रोचक है , उतना ही नैसर्गिक भी है। यह शीर्षक हमें बताता है कि अगर यह किसी कहानी का नाम है तो इसका किरदार वाकई पूरी कहानी के दौरान एक जगह से दूसरे जगह भागता ही रहेगा । वह किसी तलाश में होगा या फिर कोई उसकी तलाश में होगा और इन दो मुख्य किरदारों के दम पर यह कहानी सरपट दौड़ती रहती है लेकिन मैं यहाँ केवल उन दोनों किरदारों का ही चित्रण नहीं करना चाहता हूँ। मैं अपने इस आलेख को नया आयाम देते हुए इसकी परिधि को वैश्विक करना चाहता हूँ। वैश्विक करने का तात्पर्य मात्र इतना है कि मैं विश्व के सभी नागरिकों को अपनी इस कहानी का किरदार बनाना चाहता हूँ। कुछ लोगों को ताज्जुब हो सकता है कि वे आखिर बेनामी रूप से ही सही लेकिन मेरी किसी कहानी का किरदार कैसे बन सकते...